'Respect begets respect’ and ‘love begets love'
यानि ‘respect के बदले में respect और love के बदले में love ‘क्या हमेशा ऐसा ही हो ये ज़रूरी है?


हम अपने जीवन में दुसरो की मदद कई बार करते हे पर हम कभी भी ये सोच के मदद नहीं करते की वो भी हमारी मदद करे या हमारे कहने पर हमारा सब काम करेगा,पर हमारे न चाहते हुए भी हमारे मन में एक उम्मीद पैदा होने लगती हे की वो हमारी मदद के बदलें में कुछ न कुछ हमको दे चाइये #Thank_you ही क्यों न बोले।
जरुरी नहीं की आप जिस की मदद कर रहिये हे वो आपको प्यार ही दे वो आपको गालिया भी देसकता हे।
जो लोग हमें दुख पहुंचाते हैं, कई बार उस वक्त वह खुद भी दर्द में होते हैं और वह स्वयं के जख्मो पर आधारित विकल्प और निर्णय करते हैं जिससे हमें चोट पहुँचती है। जब भी हम किसी अपनों से या अपने चाहने वालों से धोखा या चोट खाते है तो उसे भूलना या माफ करना अत्यंत मुश्किल होता है।जीवन है तो गलतियाँ होना भी स्वभाविक है। जिंदगी में लोग जाने-अंजाने कई गलतियाँ करते रहते है। भूल होना कोई गलत बात नही है लेकिन भूल को स्वीकार ना करना या क्षमा ना माँगना यह गलत है। जब गलती हमसे हो तो हम उम्मीद करते है कि हमें माफी मिल जाए और गलती दूसरों से हो तो हम नाराज होकर बैठ जाते है और इंतजार करते है कि सामने वाला हमसे आकर माफी माँगे।


आज मने पढ़ा की "क्षमा करो और आगे बढ़ो”
गलती तो मेरे से हुई हे मुझे ये भी पता हे की मेरी गलती माफ़ नहीं हो सकती और में चाहता भी नहीं की मुझे माफ़ी मिले। कितना आसान है किसी से एक शब्द sorry कह कर आगे निकल जाना और बदले में अपने आप ही ये सोच लेना कि उस व्यक्ति ने हमे माफ़ भी कर दिया होगा। misunderstanding always create big mistake.
एक दोस्त  जो मुझे खुश रखने के लिए अपनी खुसी की क़ुरबानी देता हे एंड एक दोस्त मेरे बारे इतनी गलतफमी लिए घूमता है
एक दोस्त जो  मेरे को  समझता  है और एक वो जो खुद को ही नहीं समज पता है।
एक दोस्त जिस के लिए में कुछ नहीं करता फिर भी मैं उसके लिए सब कुछ हु और एक वो जिस के लिए कितना भी कुछ कर लो फिर भी में उसके लिए कुछ नहीं

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